वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी कार्यालय में किसानों के नाम निकल गया बीज, कृषक अंजान

वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी कार्यालय में किसानों के नाम निकल गया बीज, कृषक अंजान

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 उड़द,मूंगफली के बीज वितरण में अधिकारियों ने किया घोटाला, योजना लाभ से अंजान हैं किसान

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बकस्वाहा क्षेत्र के अलग अलग गांव में रहने वाले किसानों के नाम कृषि विभाग ने बीज निकाल बाजारों में बेच दिया,जब किसानों से योजना लाभ के बारे में पूछा गया तो पता चला कि फर्जीवाड़ा के शिकार हुए किसान योजना से भी अंजान हैं न तो वे कृषि विभाग गए ना ही आवेदन किया बावजूद इसके उनके नाम बीज निकाल लिया गया। 


किसानों के नाम खजुराहो, छतरपुर दवाई दुकान के बिल 

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जिले से करीब 110 किलोमीटर दूर स्थित बकस्वाहा के किसानों के नाम पर खजुराहो,छतरपुर स्थित दवाई दुकानों के बिल लगाए जा रहे है जिससे योजना सवालों के घेरे में है कि क्षेत्र में करीब 15 दवाईयों की दुकानें स्थित होने के बाद भी किसान खजुराहो, छतरपुर दवाएं खरीदने क्यों जाएगा जबकि पास में दमोह जिला मुख्यालय भी महज 50 किलोमीटर की दूरी पर ही स्थित हैं।


किसान के नाम बीज का वितरण, कृषक को पता नहीं

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कृषि विकास विभाग बकस्वाहा अंतर्गत उड़द,मूंगफली,ज्वार बीज वितरण में दिखाए गए अलग - अलग गांव के किसानों से जब उन्हें प्राप्त योजना लाभ के बारे पूंछा तो कुछ किसान ऐसे भी जिन्होंने बीज के लिए ऑनलाइन पंजीयन तक नहीं किया न किसी से बीज के लिए दस्तावेज़ दिए फिर भी बीज कैसें निकल गया?प्यारेलाल आदि०, कलुवा,गोटी, तिजुवा आदिवासी, कुसुम कहते हैं कि उन्हें जानकारी दिए बगैर उनके नाम बीज निकाल लिया गया।


प्राकृतिक खेती दर्शाके उड़द निकाला, अधिकारी बोले- ऐसी योजना नहीं हैं।

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प्रदर्शन योजना में आए उड़द बीज के 1400 किलो बीज को  प्राकृतिक खेती अंतर्गत वितरण दर्शाते हुए कृषकों की फर्जी सूची बनाई गई हैं। ऐ सभी ऐसे किसान हैं जिनका उड़द के लिए ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन नही हुआ हैं, आधारकार्ड नंबर व रकवा भरके सूची बनाई गईं है जिसमे 8,10,12,16,20 किलो मनमर्जी बीज वितरण दिखाया है। जब इस विषय पर शाखा प्रभारी आर.एन.गोयल से पूछा गया था उन्होंने कहा उड़द का प्रदर्शन बीज 20 किलो का ही होता हैं उसे तोड़ा नहीं जा सकता हैं। 

प्राकृतिक खेती पर अलग - अलग मत

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 जब प्राकृतिक खेती योजना के बारे में अधिकारी - कर्मचारी से पूछा जाता है तो वे अलग - अलग मत देते है। एसडीओ रवीश सिंह एवम डीडीए के.के वैद्य प्राकृतिक खेती जैसी योजना न होने की बात करते है। डीडीए कहते हैं कि प्राकृतिक खेती के लिए अलग कैफेटेरिया बनता है,जबकि एन.एफ.एस.एम शाखा प्रभारी राम नरेश गोयल कहते हैं कि प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए प्रदर्शन बीज का एक हिस्सा निशुल्क बांटा गया हैं ताकि गोबर इत्यादि से प्राकृतिक तरीके से खेती की जा सके।

महिला की जाती बदल कर दर्शाया वितरण

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प्राकृतिक खेती उड़द बीज वितरण में बतौर किसान दर्शाई गई कुसुम बेवा मूलचंद्र बसोर, पूछने पर कहती हैं कि उनका वास्तविक नाम बदलकर कुसुम बेवा मूलचंद्र अहिरवार करके बीज निकाला गया। कुसुम के आधार कार्ड नंबर पर बीज निकाला गया हैं।


तिजुवा के नाम बट गई मूंगफली, तिजुवा बोले ' मैने नहीं ली'

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 राष्ट्रीय जब सिद्धाई गांव के तिजुवा पिता मल्ला आदिवासी से पूछा तो उन्होंने बताया कि उन्होंने न तो कभी आवेदन किया न ही बीज लिया,इसके बाद भी उनके नाम मूंगफली का फर्जी वितरण दिखा दिया है। ठीक ऐसी ही बात निमानी गांव के कलूवा आदिवासी भी कहते है जिनके नाम मूंगफली निकाली गईं हैं।

फर्जीवाड़े में फर्जी मो० नंबर का खेल 

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आंकड़े कहते हैं कि कृषकों के नाम फर्जी वितरण करने के लिए जिम्मेवारोंं ने फर्जी मोबाइल नंबर का सहारा लिया है प्राकृतिक खेती उड़द के नाम से तैयार की गई लिस्ट में बाजना, निमानी, ढिंमरवा, दरगुंवा, सिद्धाई आदि गांवों के किसानों के मोबाइल नंबर बदले गए है नंबर डायल करने पर अधिकांश नंबर अवैध है,तो वहीं कुछ छत्तीसगढ़, पुणे,मऊरानीपुर, बिहार लग रहे हैं ।

 वहीं मूंगफली के कृषकों की लिस्ट में तिजुवा आदिवासी के मो० नं की जगह ए.ई.ओ अमन जैन का मो० नं पाया गया,किसान हरिराम पिता पुटटन अहिरवार , प्यारेलाल पिता कन्नू आदिवासी के सामने ए.ई ओ सत्यम उपाध्याय के धार निवासी परिचित मित्र का नंबर पाया गया हैं।

 किसानों के खाते में सब्सिडी नहीं आई सब्सिडी, गड़बड़ी की आशंका

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धनौरा ग्राम की रूपाली असाटी, मढिया बुजुर्ग की बिमला असाटी, जुझारपुरा गांव की कुसुमरानी लोधी, कहते है कि उन्होंने वर्ष 24-25 में उड़द का बीज लिया था इसके बाद भी उनके खाते में आज तक सब्सिडी राशि अंतरित नहीं हुई है जिस वजह से उन्हे गड़बड़ी की शंका हैं।

अधिकारियों को शिकायत के बाद भी नहीं होती है कार्रवाई?

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विकासखंड बकस्वाहा अंतर्गत आने वाले गांवों के किसानों के साथ हुए फर्जीवाड़े की शिकायत जब उच्च अधिकारियों से की जाती है तो भी अधिकारी इस पर ध्यान नहीं देते है। बीते साल हुए जौ के बीज वितरण में में फर्जीवाड़े की बार - बार शिकायत के बाद जांच तो हुई लेकिन आज तक रिपोर्ट डीडीए कार्यालय नहीं पहुंची जिससे दोषियों पर कार्रवाई नहीं हो सकी है।


इनका कहना

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अभी हम हॉस्पिटल में है कल देखते है।

एसडीओ, रवीश सिंह


 कॉल करने पर भी फोन रिसीव नहीं हुआ।

डीडीए, के के वैद्य


 पूरे मामले में जो भी जानकारी है हमारे पास भिजवाए, हम दिखवाते हैं।


जे.डी.ए सागर ,बी. एल. विल्लैया

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