दमोह समाचार | damoh - news

 घट में सूजत नहीं लानत ऐसे जिंद, तुलसी ऐसे जीव को भयो मोतियाबिंद

संत, भक्त और ब्राह्मण का कभी भी अपमान नहीं करना चाहिए।


नीरज ठाकुर | दमोह

दमोह : टंडन बगीचा निवासी ठाकुर परिवार द्वारा 29 सितंबर से 5 अक्टूबर तक पितृपक्ष में पुराने डीईओ कार्यालय में श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन किया जा रहा है।

कथा के पंचम दिवस पूज्य किशोरी वैष्णवी गर्ग जी कथा की शुरुआत करते हुये कहा हम सभी जिनके द्वारा चलित है जिनके द्वारा रचित है अर्थात जिनके बिना हम कुछ नहीं है आज उन्ही की परम कथा में हम बैठे है और उनकी कथा सुनने का अवसर हमें प्राप्त हुआ है। और अगर वो नहीं होते तो हम लोग भी नहीं होते। उस परम पूज्य परमात्मा की अनुकम्पा का ये दिव्य दर्शन है। कि पंचम दिवस के कथा क्रम में दशम स्कन्द के विशेष जो की भागवत का प्राण है। भागवत का प्राण क्यों है ? क्योंकि इसमें भगवान श्री कृष्ण के बाल लीलाओं के विशेषता का वर्णन किया गया। और भगवान श्री कृष्ण की बाल लीलाओं का श्रवण, गायन दोनों ही जैसे एक चुम्बक, चुम्बक जैसे लोहे को अपनी तरफ खींचती है। वैसे भगवान की बाल लीलाएं श्रवण करने वाले का मन भगवान श्री कृष्ण पूर्ण युगेश्वर के शरणागति हो जाता है। चुम्बक की तरह खींचा हुआ चला जाता है। और वो भाग्यशाली है जिन्होंने अपने जीवन का धेव भगवान श्री कृष्ण के बाल चरित्रों को श्रवण करने का बना रखा है।

किशोरी जी ने आगे कहा कि शास्त्रों में, पुराणो में, रामायण में हर जगह पर मानव जीवन की विशेष बाते लिखी है की मानव जैसा जीवन किसी ओर का नहीं है। जब भगवान मानव जीवन देते हैं इसका मतलब है भगवान तुम्हे मुक्ति प्राप्त करने का, ईश्वर को प्राप्त करने का अवसर देते हैं। अगर तुम मानव जीवन में आ गए हो तो भगवान ने कह दिया है की मैं तुमसे मिलने के लिए तैयार हूं लेकिन ये तुम्हारे कर्मों पर निर्भर करता है की तुम अच्छे मानव बन पाए, भक्त बन पाए तो तुम मुझसे मिलने के अधिकारी हो जाओगे।

पूज्य किशोरी जी ने पंचम दिवस की कथा प्रारंभ करते हुए श्री राम ओर कृष्ण जन्म पर दसरथ जी ओर नंद बाबा की खुशी का वृतांत सुनाते हुए कहा की जब प्रभु ने जन्म लिया तो वासुदेव जी कंस कारागार से उनको लेकर नन्द बाबा के यहाँ छोड़ आये और वहाँ से जन्मी योगमाया को ले आये। नंद बाबा के घर में कन्हैया के जन्म की खबर सुन कर पूरा गोकुल झूम उठा। किशोरी जी ने कथा का वृतांत बताते हुए पूतना चरित्र का वर्णन करते हुए कहा की पुतना कंस द्वारा भेजी गई एक राक्षसी थी और श्रीकृष्ण को स्तनपान के जरिए विष देकर मार देना चाहती थी। पुतना कृष्ण को विषपान कराने के लिए एक सुंदर स्त्री का रूप धारण कर वृंदावन में पहुंची थी। जब पूतना भगवान के जन्म के ६ दिन बाद प्रभु को मारने के लिए अपने स्तनों पर कालकूट विष लगा कर आई तो मेरे कन्हैया ने अपनी आँखे बंद कर ली, कारण क्या था? क्योकि जब एक बार मेरे ठाकुर की शरण में आ जाता है तो उसका उद्धार निश्चित है। परन्तु मेरे ठाकुर को दिखावा, छलावा पसंद नहीं, आप जैसे हो वैसे आओ। रावण भी भगवान श्री राम के सामने आया परन्तु छल से नहीं शत्रु बन कर, कंस भी सामने शत्रु बन आया पर भगवान ने उनका उद्दार किया। 

किशोरी जी ने कहा संतो ने कई भाव बताए है कि भगवान ने नेत्र बंद किस लिए किए ? इसका तो नाम ही है पूतना, इसके तो पूत है ही नहीं, कितना अशुभ नाम है पूतना। एक ओर भाव है कि इसे किसी के पूत पसंद भी नहीं हैं इसलिए बच्चों को मारने जाती है। भगवान जो भी लीला करते हैं  श्रीकृष्ण ने सोचा कि सब रस तो ले चुका हूँ अब रसा (पृथ्वी) रस का आस्वादन करूँ। पृथ्वी का नाम क्षमा भी है।

अत: श्रीकृष्ण ने क्षमारूप पृथ्वी अंश धारण किया। भगवान व्रजरज का सेवन करके यह दिखला रहे हैं कि जिन भक्तों ने मुझे अपनी सारी भावनाएं व कर्म समर्पित कर रखें हैं वे मेरे कितने प्रिय हैं। भगवान स्वयं अपने भक्तों की चरणरज मुख के द्वारा हृदय में धारण करते हैं। पृथ्वी ने गाय का रूप धारण करके श्रीकृष्ण को पुकारा तब श्रीकृष्ण पृथ्वी पर आये हैं। इसलिए वह मिट्टी में नहाते, खेलते और खाते हैं ताकि पृथ्वी का उद्धार कर सकें। अत: उसका कुछ अंश द्विजों (दांतों) को दान कर दिया। गोपबालकों ने जाकर यशोदामाता से शिकायत कर दी–’मां ! कन्हैया ने माटी खायी है।’ उन भोले-भाले ग्वालबालों को यह नहीं मालूम था कि पृथ्वी ने जब गाय का रूप धारणकर भगवान को पुकारा तब भगवान पृथ्वी के घर आये हैं। पृथ्वी माटी,मिट्टी के रूप में है अत: जिसके घर आये हैं उसकी वस्तु तो खानी ही पड़ेगी। इसलिए यदि श्रीकृष्ण ने माटी खाली तो क्या हुआ? ‘

श्रीमद् भागवत कथा के इन षष्ठम दिवस पर उद्धव चरित्र, रूक्मिणी विवाह, रास पंचाध्यायी  का वृतांत सुनाया जाएगा मुख्य यजमान श्रीमती द्रोपती सिंह ठाकुर, महेंद्र प्रताप सिंह ठाकुर, आशीष सिंह ठाकुर है के अलावा बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे. ठाकुर परिवार ने सभी से कथा श्रवण करने की अपील की है

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